यह लड़की खुद एक अनाथ है अनाथों को आरक्षण दिलाने वाली अम्रुता करावंदे

किसी दूसरे का दर्द केवल वही समझ सकता है, जो खुद दर्द सहा हो। कुछ ऐसी ही कहानी है अमरूता कारवंदे की। अमरूता पुणे के मॉडर्न कॉलेज से अर्थशास्त्र में एमए की पढ़ाई कर कर रही हैं। अमरूता जब तीन साल की थी तो माता-पिता ने उन्हें अनाथालय में छोड़ दिया था। 18 साल की उम्र तक अनाथालय में रहीं और उसके बाद उन्हें अनाथालय खाली करने को कह दिया गया क्योंकि अब ये खुद अपना खर्च निकाल सकती थीं।

यह लड़की खुद एक अनाथ है अनाथों को आरक्षण दिलाने वाली अम्रुता करावंदे

इसके बाद पुणे चली गईं और स्टेशन पर एक रात बितानी पड़ी। खर्च चलाने के लिए घरों, दुकानों और अस्पतालों में काम करके पैसे की व्यवस्था की। उनके एक दोस्त ने पढ़ाई करने की सलाह दी और एक कॉलेज में दाखिला ले लिया जिसके बाद उन्हें रहने के लिए एक हॉस्टल मिला और रहने की समस्या खत्म हो गई। स्नातक के बाद, 2017 में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षा  दी और सौ में 39 फीसदी अंक मिले।

परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए, क्रीमीलेयर समूह 46% और जबकि नॉन क्रीमी लेयर ग्रुप को 35% अंक चाहिए थे। उनके पास नॉन-क्रीमी लेयर का कोई प्रमाण पत्र नहीं था, जिसकी वजह से कोई नौकरी नहीं मिली। इसके बाद, सरकारी नौकरियों में अनाथ बच्चों के आरक्षण के लिए अभियान चलाने का फैसला किया। महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ एक साल के अभियान के बाद, महाराष्ट्र सरकार ने उनकी मांग को स्वीकार कर लिया। इनकी मदद से सरकारी नौकरियों में सरकारी अनाथ बच्चों को आरक्षण देने वाला देश पहला राज्य बन गया। इनका इरादा  पूरे देश के अनाथ और बेसहारा बच्चों का जीवन संवारने की लड़ाई लडऩा है  ताकि वे अपने अधिकारों को प्राप्त कर सकें।

हाल ही में, महाराष्ट्र सरकार द्वारा चलाए गए अभियान के बाद, महाराष्ट्र सरकार ने अनाथ बच्चों को जनरल कोटे से नौकरियों में एक प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला किया है। पिछले साल, उन्होंने ‘गेट एजुकेशन एंड जॉब कोटा’ अभियान शुरू किया जिसे बड़े पैमाने पर समर्थन मिला।

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