शौचालय ना होने के कारण नहीं करता इस गांव में कोई अपनी बेटी की शादी

शौचालय ना होने के कारण नहीं करता इस गांव में कोई अपनी बेटी की शादी
शाहजहांपुर: खुले में शौच से मुक्ति के लिए केंद्र सरकार स्वच्छ भारत मिशन के तहत करोड़ों रुपए शौचालय बनाने के लिए दे रही है। लेकिन उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के कई गांव आज भी खुले में शौच से मुक्ति की राह देख रहे हैं। आलम यह है कि अब इन गांवों में लोग अपनी बेटियों की शादी नहीं करना चाहते। जिसकी वजह से कई लड़के कुंवारे ही हैं|इस जिले के इन गांवों का यह आलम तब है जब सूबे के नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना शाहजहाँपुर से विधायक है। ऐसा नहीं है कि सरकार ने शौचालय के लिए पैसा नहीं दिया। कर्मचारियों और अधिकारीयों की लापरवाही की वजह आज भी कई गांव शौचालय से वंचित हैं। हालांकि अधिकारी गांवों को ओडीएफ मुक्त करने का दावा कर रहे है। इसके बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। शाहजहांपुर शहर से मात्र दस किलोमीटर दूर बसे ग्राम पंचायत सीउरा का मंजरा सिंगरही गांव में वर्षों से महिलाएं, लड़कियां और पुरुष खुले मे शौच जाने को मजबूर हैं। गांव में शौचालय न होने की वजह से यहां के लड़कों की शादियां तक नहीं हो पा रही है। कोई भी अपनी बेटी का रिश्ता इस गांव के लड़कों से करने को तैयार नहीं है। इतना ही नहीं इन गांवों में आए दिन रेप की घटनाएं हो रही है। जिसकी वजह से खुले में शौच जाने से लड़कियां और महिलाएं अपने आपको भयभीत महसूस करती हैं।
गांव वालो का कहना है की उनके गाव मे शौचालय न बनने की बजह उनका अनुसूचित जाति का होना  है । गाव के लोग हरिजन है और उनका प्रधान ऊंची जाति का है जिसके चलते उनके नाम सूची मे नहीं भेजे गए। वही ग्रामीणो का आरोप है के प्रधान ने अधिकारियों से मिलकर अपने करीबियों को दो दो शौचालय दिलाये है |
 मुख्य विकास अधिकारी  प्रेरणा शर्मा का कहना है कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत सरकार की यह प्राथमिकता है कि जो खुले में शौच जाते हैं उन गांवों को खुले में शौच से मुक्त कर सफाई का संदेश देना है। जनपद में करीब 2 लाख 20 हजार 886 टॉयलेट तैयार है। इस बारे मे भी जानकारी आई है के कुछ गाव और उनके मंजरे ऐसे है जहां पर कोई शौचालय नहीं बन पाया है  जो की पहले सूची से छूट गए थे उनका दोबारा जांच कराई गयी है उनकी फीडिंग की जा रही है जो 30 नवम्बर तक पूरी कर ली जाएगी| पात्रता मे नाम शामिल न होने पर मुख्य विकास अधिकारी का कहना है के इसमे प्रधान की कोई भूमिका नहीं होती है अगर किसी पात्र को अपात्र बनाया गया है तो इसमे जो भी दोषी होगा उस के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी|
बड़ा सवाल ये है के इस गाव मे आखिर कब लोग अपनी बेटियो को ब्याहना शुरू करेंगे और कब हमारा समाज जाति वाद से मुक्ति पा सकेगा। कब तक लोग जात पात के नाम पर गरीबो का शोषण करते रहेंगे आखिर कब महिलाए अपने आप को सुरक्षित महसूस करेंगी। क्यूकि सरकार और अधिकारियों के पास आंकड़े तो है पर गरीब आज भी शौचालय को तरस रहा है आज भी उसका शोषण हो रहा है|

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