अयोध्या और बनारस में धर्मसभा  सरकार पर चौतरफा बनाया जा रहा मंदिर बनाने का दबाव

अयोध्या और बनारस में धर्मसभा सरकार पर चौतरफा बनाया जा रहा मंदिर बनाने का दबाव
अयोध्या राम जन्म भूमि को लेकर जहां एक तरफ अयोध्या में विश्व हिंदू परिषद की तरफ से धर्म संसद बुलाया गया है तो वही धर्म की नगरी वाराणसी में भी राम जन्मभूमि और सनातन धर्म के लेकर धर्म संसद का आयोजन किया जा रहा है । बड़ी बात नहीं है कि अयोध्या और काशी में होने वाले धर्म संसद दोनों एक ही दिन हो रही है और दोनों स्थानों पर बड़े स्तर पर लोग पहुंच रहे हैं । ऐसे में माना जाए तो जहां अयोध्या में राम जन्म भूमि को लेकर विश्व हिंदू परिषद द्वारा अयोध्या से सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की जाएगी तो वही पीएम के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से भी संत समाज अयोध्या राम जन्म भूमि को लेकर सरकार पर दबाव बना सकती है । वाराणसी में होने वाले धर्म संसद को स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती संबोधित करेंगे  , काशी में आयोजित यह धर्म संसद 3 दिनों तक चलेगा जिसमे देश के समस्त संत समाज से जुड़े लोग इकट्ठा हो रहे है ।
आज का दिन देश और राम भक्तों के लिए खास होने वाला है. ऐसे में जहां आज  अयोध्या में विश्व हिंदू परिषद, आरएसएस,शिवसेना तमाम हिंदू संगठन मिलकर धर्म सभा करने जा रहे हैं वैसे में शिव की नगरी काशी में मोदी के संसदीय क्षेत्र में भी परमधर्म संसद का आयोजन किया गया है.परम् धर्म संसद 1008 के नाम से आयोजित इस धर्म संसद में संत,महंत और महात्मा के साथ ही साथ राजनैतिक पार्टियों के लोग भी शामिल हो सकते है. जहां एक तरफ अयोध्या राम मंदिर के लिए हिंदुओं के भीड़ का गवाह बनेगा वहीं दूसरी तरफ शिव की नगरी काशी में भी संत और महंत न केवल जुटेंगे बल्कि धर्म के रक्षा और संरक्षण के लिए एक नई दिशा तय करेंगे. काशी में होने वाले इस धर्म संसद का कई मायने निकाले जा रहे हैं एक तो यह कि ये धर्म संसद उस वक्त आयोजित किया जा रहा है जब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए विश्व हिंदू परिषद सहित तमाम संगठन सरकार पर राम मंदिर निर्माण के लिए एक दबाव तैयार कर रहे है.ठीक उसी समय काशी विश्वनाथ कॉरिडोर जो प्रधानमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट में  एक है, के निर्माण में हो रहे अनियमताओं के खिलाफ साधू संतो का बड़ा जमाबड़ा हो रहा है.जो सीधे तौर पर मोदी के विरोध का ताना बाना माना जा रहा है.

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